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यादव का असली इतिहास

 यादव समाज के ज्यादातर लोग अपने बारे में कुछ नहीं जानते है और न ही अपना सही इतिहास जानते है। कुछ लोग अपने आप को ऊंची जाति का मान लेते है और बाकियों से श्रेष्ठ मान लेते है तो कुछ अपने आप को क्षत्रिय मान लेते है तो कुछ कृष्ण के वंशज मान लेते है । लेकिन ब्राह्मण धर्म के वेद, स्मृतियां, ग्रंथ, रामायण, विदेशी यात्रियों के नोट्स और पुरातात्विक प्रमाण कुछ और ही कहते हैं । मैं “पंकज ध्वज” तथ्यों के साथ इस विषय पर बहुत दुर्लभ जानकारियां इक्कठा किया हूं।

मनुस्मृति, अध्याय 1 का श्लोक 91

शुद्र के कर्म दिए गए है शुद्र को पढ़ने लिखने का अधिकार नहीं होता था । जो यादव पे फिट बैठता है क्योंकि अंग्रेजों के आने से पहले यादव पढ़े लिखे नहीं होते थे । मतलब यादव शुद्र है।

मनुस्मृति, अध्याय 2 का 37 श्लोक में उपनयन संस्कार के उम्र का जिक्र है । उसमे ब्रह्मतेजाभिलाषी ब्राह्मण का गर्भ से 5 वर्ष में, बालाभिलाषी क्षत्रिय का 6 वर्ष में और धनाभिलाषी वैश्य का 8 वर्ष में उपनयन संस्कार करना चाहिए । लेकिन ग्वाला समाज में ये उपनयन प्रक्रिया बचपन में नहीं होती है, मतलब यादव शुद्र है।

वाल्मिकी रामायण, युद्धकांड, सर्ग 22 श्लोक 33 से 39

राम जब समुद्र को सुखाने के लिए धनुष उठाता है तो समुद्र आदमी के रूप में प्रगट होता है और समुद्र कहता है की आप वाण प्रत्यांचा पे चढ़ा ही लिए हो तो वहां आभीर (यादव) आदि निवास करते है जिसके रूप और कर्म बहुत भयानक है, वे पापी है, वे सब मेरा जल पी कर दूषित कर देते है। इनका स्पर्श मैं नहीं सह सकता । आप अपने इस वाण को वहीं सफल करें । और राम वाण चला कर मरुस्थल बना देता है और अभीरों आदि को नष्ट देता है ।

तुलसीदास की रामचरितमानस, उतरकांड, सर्ग 129 के छंद 1 में आभीर (यादव), चंडाल आदि को अत्यंत पाप रूपी बताया है।

व्यास स्मृति, अध्याय 1 के 11 से 13 श्लोक में ग्वाला (यादव), नाई, कुम्हार, बढ़ई, चमार, धोबी, चंडाल समेत बहुत सारी जातियों को अंत्यज कहा गया है । इनमे से एक पे भी दृष्टि पड़ जाए तो सूर्य की ओर देखना चाहिए । अगर बात हो जाए तो स्नान करना चाहिए तभी द्विज (ऊंची जाति के व्यक्ति) शुद्ध हो पता है ।

ऋग्वेद (वेदांत तीर्थ भाष्य), मंडल 1 का 101 सूक्त के 1 मंत्र में लिखा है

हे ऋषिगण इंद्र कि हवि द्वारा स्तुति करो। ऋजिश्वा के सहयोग से, “कृष्णासुर” की गर्भिणी स्त्रियों के साथ उसका संहार करने वाले, दाएं हाथ में बज्र धारण करने वाले, मरूतों की सेना के साथ स्थित रहने वाले, बल संपन्न उस इंद्र कि कामना करने वाले इंद्र का हम याजक मित्रभाव से हम आवाह्न करते है ।

यानि यहां साफ साफ कृष्ण को असुर बताया गया है।

ऋग्वेद, मंडल 8 का 96 सूक्त के 13 से 17 मंत्र में “कृष्णासूर” को दस हजार सेना सहित इंद्र ने बृहस्पति की सहायता से पराजित करके की निर्मम हत्या कर देता है।

इन सारे मंत्रों से स्पष्ट है की वेदों में कृष्ण असुर है ।

इसलिए 16 वी सदी में ग्वाला सूरदास को कृष्ण की भक्ति का अधिकार था और ब्राह्मणों को कोई आपत्ति भी नहीं हुई क्योंकि वेदों के अनुसार तो कृष्ण असुर था, लेकिन सूरदास का कृष्ण किशोरावस्था तक ही था और एक ग्वाला था । जबकि व्यास का कृष्ण क्षत्रिय था ।

बाद में दोनो को जोड़ दिया गया ।

कृष्ण की जितनी भी किशोरावस्था की कहानी है वो सब सूरदास की रचना सुरसागर और सूरसारावली से आई है।

जब कृष्ण काल्पनिक है तो यादवों का असली इतिहास क्या है ??

310 ईसा पूर्व मेगास्थनीज ने अपने इंडिका में भारतीयों को 7 पार्ट में बांट कर दिखाया है ।

1. विद्वान वर्ग 2. कृषक वर्ग 3. पशुपालक वर्ग (चरवाहा) 4. कारीगर वर्ग 5. सैनिक वर्ग 6. दुकानदार वर्ग 7. गरीब वर्ग

उन्होंने ये भी लिखा की बाकी के वर्ग पशुपालक और कृषक वर्ग का बहुत इज्जत किया करते था । उस समय कोई जाति व्यवस्था या भेदभाव नहीं थी और सभी का आदर किया जाता था।

यानि चंद्रगुप्त मौर्य कालीन एक पशुपालक वर्ग भी मौजूद था।

लॉरेंस वाडेल ने 19 वी सदी के आखिरी दशक में पटना के भिखना पहाड़ी को देखने गए और जांच किए और अपनी पुस्तक “डिस्कवरी ऑफ द एक्जैक्ट साइट ऑफ अशोकाज क्लासिक कैपिटल ऑफ पाटलिपुत्र” (1892) में लिखे की सचमुच यह एक कृत्रिम पहाड़ी है, कोई 40 फीट ऊंची है और 1 मील के घेरे में है । और वहां पे कुछ लोग पूजा करने जाते थे , उन लोगों में दुसाध, ग्वाल (अहिर) थे।

ये लोग दूध, मिठाई, फल, फुल, रेशम धागे आदि से “भिखना कुंवर” (अर्थात राजकुमार महेंद्र (पाली में महिंद) सम्राट असोक के पुत्र) की पूजा करते थे और उनको अपना आराध्य मानते थे । इसके बारे में चीनी यात्री फाह्यान और भाषा वैज्ञानिक राजेंद्र प्रसाद सिंह भी अपने पुस्तक “सम्राट अशोक नया परिपेक्ष” में लिखे है।

मम्मलापुरम में 10 वी सदी का एक शिला चित्र मिला है जिसका जिक्र डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद सिंह अपने पुस्तक “खोए हुए बुद्ध की खोज” में की है जिसमें बुद्ध जैसी आकृति गाय का दूध निकल रहे है।

21 वी सदी के प्रथम दशक में मिट्टी के टिल्ले की खुदाई से सुजाता का स्तूप मिला है और आठवीं सदी के एक अभिलेख से इस स्पूत का सत्यापन हुआ है जिसमें लिखा है की यह सुजाता गृह है । यह वही सुजाता है जिसके बारे में कहा गया है जब गौतम बुद्ध भूखे प्यासे उपासना कर रहे थे तो उन्हें खाना खिला कर उनकी जान बचाई थी । और ये सुजाता ग्वाला थी जिसके याद में विशाल स्तूप बनवाया गया है । इस उत्खनन प्रमाण का सत्यापन भी ह्वेनसांग ने सातवीं सदी में किया है ।

ह्वेनसांग की भारत यात्रा (सम्यक प्रकाशन), पेज 240

7 वीं सदी में वकायदे ह्वेनसांग ये लिख के जा रहे है की सुजाता ग्वाला पुत्री थी

ये सब बातों, तथ्यों, प्रमाणों को ध्यान से देखा जाए तो हमें तीन बातें देखने को मिलती है की

1. यादव (ग्वाला) समाज का कनेक्शन कहीं न कहीं बुद्धिस्ट साम्राज्य से है, ये राजकुमार महिंद को अपना आराध्य मानते थे बीसवीं सदी तक।

2. उत्खनन प्रमाण भी मिल रहे है जिससे ये पता चल रहा है की पशुपालक वर्ग में बुद्धिस्ट भी थे ।

3. ब्रह्मणवादियों ने अपनी सारी किताबें बौद्ध विरोध में लिखी है इसलिए यादवों को अपने धार्मिक ग्रंथों, पुस्तकों में इतना नीचा, पापी, अंत्यज दिखाया है ।

तो इन सारे तथ्यों से साफ होता है की यादव (ग्वाला) समाज भी भारत का मूल समाज था जो सम्यक संस्कृति से तालुकात रखता था और आज के वर्तमान समय में अपना इतिहास ना जानने के कारण ब्रह्मणवादियों के चंगुल में फंसते जा रहा है।

आज यादव समाज का जो सुधार और विकास हो पा रहा है उसका सबसे बड़ा कारण है संविधान । क्योंकि अब यादव पढ़ने लिखने लगे है । हक के लिए लड़ने लगे है । पाखंड को समझने लगे हैं । लालू प्रसाद, मुलायम सिंह यादव, शरद यादव जैसे नेताओं के वजह से भी यादव समाज का सशक्तिकरण हुआ। बी पी मंडल का मंडल कमीशन के सिफारिशों से कुछ आरक्षण मिल पाया । पाखंड के विरोध में उत्तर भारत के परियार ललई सिंह यादव ने मुकदमा संख्या 291/1971 जीतकर यूपी सरकार से सच्ची रामायण (रामायण के पाखंड उजागर करने वाली पुस्तक) की जप्त प्रतियां लौटाने को मजबूर किया था थी और सच्ची रामायण से बैन हटवाया था।

ऐसे बहुत सारे तथ्य है जिसे एक पोस्ट में लिखना संभव नहीं है ।

यादव समाज को इस घृणित, जातिवाद, ऊंचनिच, भेदभाव आदि से भरे ब्राह्मणवादी समाज को छोड़ कर सम्यक संस्कृति में वापस लौटना चाहिए जहां हमारे पूर्वज थे। ये काल्पनिक देवी देवताओं, कर्मकांड और पूजा पाठ से सिर्फ पोंगा पण्डो का ही विकास हो सकता है आपका नहीं।

भारत बुद्ध काल में विश्वगुरु था । चीन, अमेरिका जैसे विकसित देशों के छात्र भारत पढ़ने आते थे । बुद्ध भारत से निकल कर पूरे विश्व में फैल गए लेकिन भारत में ही उनका उतना प्रभाव नहीं है ।

कोई मोटरसाइकिल में अगर अशोक चक्र रहता है तो लोग कहते है की ये व्यक्ति बुद्धिस्ट है।

कोई कार में अगर अशोक चक्र रहता है तो लोग कहते है की पूरा परिवार ही बुद्धिस्ट है।

भारत देश के झंडे में ही अशोक चक्र है तो अब मानना पड़ेगा कि भारत देश ही बुद्धिस्ट है।

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दुनिया का सात सबसे रहस्यमई जगह, प्रवेश निषेध

मानो या ना मानो लेकिन दुनिया में कई ऐसी अद्भुत जगह है जो मनुष्य के लिए वर्जित है इसका सीधा सा मतलब है कि आपको वहां जाने की अनुमति नहीं है यदि आप इनमें से किसी भी जगह में घुसने की कोशिश करते हैं तो आप बहुत बड़ी मुश्किल में फंस जाएंगे ऐसे गुप्त जगहों का मुख्य कारण यह है की ये सभी स्थान या तो संरक्षित विरासत स्थल है या इनमें खुफिया वस्तु और प्राचीन गुप्त दस्तावेज मौजूद है ।

तो चलिए जानते हैं दुनिया के सात ऐसी खुफिया और रहस्यमई स्थानों के बारे में 

1. गोल्ड वॉल्ट इंग्लैंड 

इंग्लैंड का बैंक कहा जाने वाला गोल्ड वॉल्ट, सोने की खान है जहां तकरीबन 7000 टन सोना रखा हुआ है जो कि यूएस फेडरल रिजर्व से भी ज्यादा है यह ब्रिटेन में स्थित है इसके अंदर साधारण आदमी प्रवेश नहीं कर सकता है। यहां पे लगे दरवाजे बंप प्रूफ होते है और इसमें आवाज पहचानने वाली प्रणाली लगी हुई है । यहां पर बहुत ही कड़ी सिक्योरिटी होती है। इस जगह पे सिर्फ इंग्लैंड के ऑफिशियल ही जा सकते है, बाकी कोई नही ।

2. पाइन गैप ऑस्ट्रेलिया

पाइन गैप मध्य ऑस्ट्रेलिया में स्थित है और ऑस्ट्रेलियाई सरकार के सबसे भारी संरक्षित रहस्यों में से एक है। ये एक उपग्रह ट्रैकिंग सुविधा है। जो ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका द्वारा संयुक्त रूप से चलाई जाती है। माइन गैप ऑस्ट्रेलिया के ऐलिस स्पिंग शहर से लगभग 18 किलोमीटर दक्षिण पश्मिम में स्थित है। इस स्थान के ऊपर से कोई भी चीज नही गुजर सकती है।इसलिए इस जगह तो विशेष सुरक्षा दी गई है। यहां सी आई ए, और ऑस्ट्रेलिया सरकार की मुस्तैदी हमेशा बनी रहती है। ये जगह ऑस्ट्रेलिया का सबसे गुप्त स्थान है जहां आम लोगो का जाना माना है।

3. लास्कॉक्स की गुफा फ्रांस

यूनिस्को की विश्व धरोहर स्थल लास्कॉक्स, दक्षिण पश्चिम फ्रांस में एक जटिल गुफा प्रणाली है, जो मोंटीना गांव के पास है। इसकी सुरक्षा क्यों की जाती है इसका कारण ये है की ये पूरी गुफा पैलियोलिथिक पेंटिंग से भरी है जो की 20 हजार साल पुरानी है । 12 सितंबर सन् 1940 को 18 साल के मार्शल रविदत्त ने इस गुफा के अंदर जाने का रास्ता खोजा था और वो इन पेंटिंग को देख कर दंग रह गए थे । और बाद में मार्शल अपने तीन दोस्तो के साथ यहां फिर से आए । वे ही आखिरी आम लोग थे जो वहां गए थे। उसके बाद फ्रांस सरकार ने इस जगह को संरक्षित कर दिया, और अब यहां ये किसी को भी जाने की इजाजत नहीं है ।

4. कोका कोला वॉल्ट यूएसए

ये तो एकदम अदभुत है, यहां पे कोका कोला का सीक्रेट फॉर्मूला रखा हुआ है । वही कोका कोला जिसे हम रोजमर्रा की जिंदगी में पीते है । ये सीक्रेट फॉर्मूला यहां पे 125 सालों से रखा हुआ है। यह यूएस के सबसे बड़े संरक्षित स्थानों में से एक है, जहां पे बहुत ही कड़ी निगरानी की जाती है। पहले ये सीक्रेट फॉर्मूला एटलान्टा में था । बाद में उसे हटा के दूसरी जगह रखा गया , जिसका नाम है वर्ल्ड ऑफ कोका कोला।

5. वेटिकन सिटी आर्काइव्स रोम

वेटिकन सिटी इटली की राजधानी रोम के अंदर स्थित एक छोटा सा स्वतंत्र देश है। वेटिकन के संघरालय और पुस्तकालय अमूल्य है, इसलिए इसे अत्यंत ही गुप्त रखा गया है। यहां आठवीं शताब्दी के दस्तावेज एवम अन्य गुप्त वस्तुएं जमीन के  गहरे अंधकार में एक गोदाम में सुरक्षित रखे गए है। आपको ये जानकर हैरानी होगी कि ये गुप्त दस्तावेज 52 मील की दूरी तक फैले हुए है । कहा जाता है की इन दस्तावेजों में काला जादू ,  एलियन, और समय यात्रा से जुड़ी बहुत ही महत्वपूर्ण बाते लिखी गई है। बीबीसी के अनुसार ये भी कहा गया है की इस सीक्रेट जगह को 2020 में विशेषज्ञों के लिए खोला जायेगा ।

6.  आर ए एफ स्टेशन इंग्लैंड

मैनविथ पहाड़ी, उत्तरी यॉर्कशायर इंगलैंड में स्थित दुनिया के सबसे रहस्यमई स्थानों में से एक रॉयल एयरफोर्स स्टेशन है।

हैरानी की बात तो ये है की इंग्लैंड में होने के वावजूद ये ब्रिटिश सरकार द्वारा नही बल्कि एन एस ए नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी द्वारा चलाया जाता है। ऐसा माना जाता है की ये स्टेशन में दुनिया के सबसे एडवांस और गुप्त उपकरण लगे हैं जो संचार के विभिन्न संकेतों को सुनने में सक्षम है। जिसका मतलब है की यहां लगे उपकरण में ऐसी ताकत है जो दुनिया में किसी भी कम्युनिकेशन सिस्टम की हलचल और बातचीत को जान सकते  हैं।

7.  बोहेमियन क्लब कैलिफोर्निया

सैन फ्रांसिस्को से 75 मील दूर बोहेमियन क्लब मौंटेरियो कैलिफोर्निया में स्थित है । बोहेमियन क्लब मुख्य रूप से बोहेमियन आर्ट्स क्लब की धरोहर है । हर साल जुलाई के महीने में यहां दो हफ्तों के लिए एक बहुत ही गुप्त और रहस्यमई कार्यक्रम होता है। जिसमे दुनिया के सबसे बड़े और गुप्त हस्तियां मौजूद रहती है । उस कार्यक्रम में क्या होता है, किसी को नहीं पता । लेकिन ऐसा कहा जाता है की उस कार्यक्रम के दौरान लोगो को आहुति दी जाती है । दुनिया के सबसे बड़े रहस्यों में से एक बोहेमियन क्लब लोगो के लिए हमेशा के लिए  उत्सुकता का विषय बना हुआ है।

हम जैसे आम इंसान तो इन जगहों पे जा नही सकते लेकिन अगर इजाजत मिले तो आप किस जगह पे जाना चाहेंगे ।।

कॉमेंट करके जरूर बताएं ।।

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तांत्रिक, ढोंगी बाबाओं का काला कारनामा

दोस्तों हमारे देश में मेडिकल सिस्टम के समकक्ष एक और सिस्टम चलता है जो इलाज करता है, वो है धर्म का इलाज।

हमारे देश में जब डॉक्टर जबाब दे देता है तो मरीज को भगवान की शरण में ले जाया जाता है और जो गलत भी नही है।

डॉक्टर खुद कहता है कि जब दवा ना काम आए तो दुआ काम आती है । यहां तक सब सही है, लेकिन कुछ लोग इस चीज को अलग ही एक्सट्रीम लेबल पे ले जाते है और काला जादू, तांत्रिक, ओझा, जादूगरों के चक्कर में पड़ते है। और उस चीज की कामना करने लगते हैं जो लगभग असंभव होती है और इसके चलते कुछ काली करतूत करने वाले लोग ओझा तांत्रिक और जादूगरों की आड़ में सब कुछ लूट लेते हैं मरीज को और मरीज के परिवार को। 

आज जो घटना के बारे में बताने जा रहे हैं उसे जानकर आपकी रूह तक कांप जाएगी और आप खुद बोलेंगे ईस रास्ते तो कभी नहीं जाना चाहिए।

1. ये घटना है गुजरात अहमदाबाद सन् 2018 की है। घटना इतनी ज्यादा खतरनाक और शर्मसार करने वाली है कि आप सुनकर ही हिल जाएंगे । देवर के सामने ही तांत्रिक ने भाभी के उतरवाए कपड़े। तांत्रिक ने कहा कि तेरे ऊपर भूत है, तू निर्वस्त्र होकर इतने कदम चलकर मेरे सामने आओ। 

साइंस दिन पर दिन तरक्की करते जा रहा है लेकिन अंधविश्वास की जड़े इस समाज में इतने अंदर तक घुस चुकीं है की चाहकर भी इस से निकलना बहुत मुश्किल है।

ये मामला गुजरात के सरसपुर के एगोगुलदास का है। यहां रहने वाली एक महिला को तांत्रिक ने उसके पूरे परिवार के  सामने निर्वस्त्र कर दिया । महिला ने इस मामले में मेघालय नगर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। इस महिला ने शिकायत की कि मैं, मेरे पति, दो बच्चों के साथ रहती हूं । छह  महीने से मुझे शारीरिक तकलीफ थी, इसके लिए मैंने दवाई ली और तांत्रिक को भी दिखा दिया लेकिन कोई फायदा नही हुआ। इसकी जानकारी मैने घरवालों को दी। घर वालों ने बताया कि उनकी नजर में एक चंदन नगर का तांत्रिक है। वह ठीक कर सकता है तुम्हें। ठीक होने के लालच में मैं वहां गई लेकिन तांत्रिक ने कुछ ऐसा कहा जो हैरान कर देने वाला था।  तांत्रिक ने कहा कि 15 साल से भूत है, कपड़े उतारो मैं भागा दूंगा। एक दिन महिला अपने पति के साथ देवर के घर गई, वहां उसके ससुर मंगा भाई और पड़ोस में रहने वाली लीला बेन मौजूद थी। उसके बाद मुझे तांत्रिक के पास ले जाया गया। तांत्रिक ने सबके सामने कहा कि इस पर 15 साल से भूत चढ़ा हुआ है इसको उतारने के लिए मुझे कुछ करना पड़ेगा, इसके कपड़े बदलने होंगे। उस तांत्रिक का नाम चेतन था। फिर चेतन तांत्रिक ने बदलने के लिए  कुछ कपड़े दिए। कपड़े देने के बाद उस तांत्रिक ने कहा कि तुम अपने कपड़े उतार कर सबके सामने 15 कदम चलकर मेरे सामने आओ। 

उस समय कमरे में देवर, देवरानी और लीलाबेन थी । ससुर और पति कमरे के बाहर थे। तांत्रिक के कहने पर  मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए। इसी दौरान जब मैं पूरी तरह निर्वस्त्र थी तो तांत्रिक ने मेरे शरीर पे पानी डाला और नींबू देते हुए कहा कि सब कुछ ठीक हो जायेगा, मुझे बहुत जोर से  डर लगने लगा तो मैने देवरानी से उस तांत्रिक की ओर से  मिला कपड़ा अपने शरीर पे डाल लिये। उसके बाद उस तांत्रिक ने सबको घर चले जाने को कह दिया । ये कहना था उस पीड़ित महिला का ।

फिर पीड़िता ने अपने पति से बताया कि उन पर भूत प्रेत की जो बातें हो रही है वो बिल्कुल गलत है। इस बात पर उसका पति से विवाद हो गया। इस वजह से वह औरत मायके चली गई पालनपुर और वही जाकर अपने माता पिता के साथ जाकर  शिकायत दर्ज कराई और बताया कि किस तरह उनके साथ गलत हुआ । दोस्तों यही सच्चाई है की तांत्रिकों के पास जाने से फायदा कुछ नहीं होता है इज्जत जरूर चली जाती है ।

2. ये घटना दुर्ग, छत्तीसगढ़ की बेहद दर्दनाक सी है। भूत प्रेत बाधा बताकर ढोंगी बैगा ने कपड़े उतरवाए और नसीला प्रसाद खिलाकर तंत्र क्रिया की आर में, लूट ली आबरू। न्यायालय ने इस ढोंगी बैगा को 13 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई है। दोषी बैगा दीपचंद 58 साल का अधेड़ है । उसने तंत्र क्रिया के नाम पे अपने गलत इरादे को अंजाम देने का पूरा प्लान बनाया हुआ था। सिरदर्द से परेशान महिला और उसके परिजन उसके बातों में आ गए। बैगा ने सिरदर्द को प्रेम बाधा बताकर महिला को नवग्रह पूजा कराने का बहाना बनाकर गांव से बाहर ले गया। वहां पूजा कर महिला को खाने के लिए प्रसाद दिया । उसे खाने के बाद महिला बेहोश हो गई और बैगा ने उसकी  इज्जत लूट ली।  बाद में होश में आने पे उसे किसी से कहने पे जान से मारने की धमकी भी दी। इस मामले में न्यायधीश मधु तिवारी ने दुष्कर्म के लिए 10 साल और जान से मारने की धमकी के लिए 3 साल का कठोर कारावास की सजा सुनाई। और 1500 का जुर्माना भी लगाया, जुर्माना नही अदा करने पे 4 माह अतिरिक्त कारा का सजा सुनाया।

3. ये घटना है मध्यप्रदेश,  खंडवा की जिसे जान कर आप हिल जाएंगे। बीमार पति को ठीक कराने के लिए महिला के साथ दो दिन तक दुष्कर्म किया। लगातार बीमार चल रहे  पति और बच्चे का जब सरकारी अस्पताल से इलाज नहीं मिला तो परेशान महिला एक तांत्रिक के पास चली गई। जिसने जादू टोने के नाम पर उसे धमकाया और फिर 1 दिन अकेले में बुलाकर तंत्र मंत्र के नाम पर उसके कपड़े उतरवाए और 2 दिन तक दुष्कर्म किया। और ऊपर से इसकी एवज में मोटी फीस भी ली और धमकाया कि अगर वह किसी से बाहर बताएगी तो उसके पति और बच्चे को तंत्र-मंत्र करके मार डालेगा। अंततः पीड़ित महिला ने तंग आकर तांत्रिक के खिलाफ मामला दर्ज करा दिया । यह घटना मोघट थाना क्षेत्र के इमलीपुरा  की है। महिला ने बताया कि बहुत लंबे समय से परिवार में समस्याएं चल रही थी। पति और बच्चे हमेशा बीमार रहते थे इसी के चलते वह तांत्रिक अमीरुद्दीन के पास पहुंची। उस तांत्रिक ने उसके पति और बच्चों के शांति के लिए तंत्र क्रिया करने को कहा। तांत्रिक ने महिला की मजबूरी का फायदा उठा लिया । सबसे पहले तांत्रिक ने जादू टोने के जरिए उसे धमकाया फिर उस महिला के साथ दुष्कर्म किया। लेकिन आखिरकार उसे पकड़ लिया गया। तांत्रिक से तंग आकर महिला ने  मोघट थाने में जाकर शिकायत दर्ज करा दी । और तब जाकर तांत्रिक बुरी तरह फस गया और उसे जेल की हवा खानी पड़ी।

ऐसी घटना प्रायः  हमारे देश के कई इलाकों में होता रहता है,  हमें जरूरत है सचेत रहने की । जहां भी ग्रामीण इलाकों में कोई महिला या कोई सख्त अंधविश्वास से पीड़ित नजर आता है तो उसे समझाने का प्रयास करें यह सब से कुछ भी फायदा नहीं होता है यदि आपके पहचान में कोई परिवार किसी तांत्रिक या बाबा के चक्कर में फंसा हुआ है तो उसकी मदद करें और उसे इस दलदल से बाहर निकलने का रास्ता दिखाएं।।

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प्रकृति के 5 सबसे रहस्यमई स्थान

हमारी प्रकृति में बारिश का होना दिन और रात का होना ऐसे ही कई चीजों के बारे में तो हम सब जानते हैं हमारे लिए बेहद जरूरी भी है लेकिन हमारी प्रकृति बहुत ही विशाल और अनोखी है इस प्रकृति में कई ऐसी घटनाएं भी होती हैं जो हमारी सोच से परे होती है और यह घटना है इतनी अद्भुत होती है कि हमें सोच में डाल देती है आज मैं आपको प्रकृति के 5 ऐसे ही रहस्यमय घटनाओं के बारे में बताऊंगा ।

1. स्पॉटेड लेक 

ये झील सर्दियों की वसंत ऋतु के दौरान बाकी झीलों जैसी ही लगती है लेकिन गर्मियों के मौसम में इस पर रंगीन गोल धब्बे बन जाते हैं जिसका कलर पीला या फिर हरा होता है यहां के लोकल लोगों का मानना है कि इस झील में पानी के हर हिस्से में अलग ही आयुर्वेदिक और रोग करने की क्षमता है जिसकी वजह से इसे अलकली लेक के नाम से भी जाना जाता है । ब्रिटिश कोलंबिया कनाडा में स्थित इस झील को देखने और आवश्यकता पड़ने पर इसके पानी को लेने अक्सर लोग यहां आते हैं। 

2. हेसडॉलेन लाइट 

नार्वे की हेसडॉलेन घाटी में एक ऐसी विचित्र घटना होती है जिसे जानकर आप आश्चर्य में पड़ जाएंगे जी हां यहां पर सन 1930 से आसमान में अनजान रोशनी देखे जाने की बात सामने आई है जो देखने में काफी अजीब लगती है यह रोशनी कहां से आती है और इसका स्रोत क्या है कोई नहीं जानता 1981 से 1984 के बीच दिसंबर के महीने में रोशनी बहुत ज्यादा घटनाएं सामने आई थी जो कि लगभग हर हफ्ते 15 से 20 घटनाएं रिकॉर्ड की गई थी लेकिन अब यह घटना बहुत ही कम हो गई है और अब अब यहां पर इस साल भर में सिर्फ 15 से 20 घटनाएं ही रिकॉर्ड की जाती है इन घटनाओं के दौरान आसमान में अलग-अलग रंग की रोशनी  देखी जा सकती है यह एक बहुत ही विचित्र घटना है और इसे देखने पर ऐसा लगता है मानो यह रोशनी यहां आसमान में तैर रही हो ईस रहस्यमई घटना के पीछे का कारण अब तक कोई पता नहीं लगा पाया ।

3. कलरफुल माउंटेन 

क्या आपने कभी ऐसा पहाड़ देखा है जो सात रंगों में बटा हो । जरूर आपने नहीं देखा होगा, यह रंग बिरंगे पर्वत किसी आर्टिस्ट की कल्पना नहीं है बल्कि यह हकीकत है । यह पहाड़ियां झेंगे डेंजियन नेशनल जूलॉजिकल पार्क का हिस्सा है। यहां की पहाड़ियां अनेक रंगों से ढकी है, जिस वजह से इन्हें रेनबो माउंटेन भी कहा जाता है इन पहाड़ियों का ये खूबसूरत रंग सैंड स्टोन और विभिन्न खनिजों के यहां लाखों साल पहले जमा होने की वजह से है। ये इलाका चीन में बहुत ही लोकप्रिय पर्यटक स्थल है और दूर-दूर से लोग इन रंग बिरंगे पहाड़ों को देखने आते हैं । प्रकृति की इस अनोखी कलाकारी को देखकर आप भी जरूर मोहित हो जाएंगे।

4. पिंक लेक

पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के समुद्र तट के पास मौजूद ये तालाब अपने आप लोगों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित कर लेता है क्योंकि इस तालाब के पानी का रंग गुलाबी है इस तालाब के पानी का रंग गुलाबी क्यों है इस बात का कोई ठोस कारण अभी तक पता नहीं चला है पर कहा जाता है कि इस तालाब में अति सूक्ष्म जीव पाए जाते हैं और इन जीवों में रेड और ऑरेंज पिगमेंट है । जिसकी वजह से इस तालाब का रंग गुलाबी है ज्यादातर लोग हेलीकॉप्टर या प्लेन से इस तालाब की सुंदरता को देखने आते हैं लेकिन अगर आप जमीन पर हैं तो आपको निराश होने की बिलकुल जरूरत नहीं है आप यहां जा सकते हैं।  इस तालाब का पानी खाड़ा है पर यह जहरीला नहीं है तो आप इस तालाब में आराम से तैर सकते हैं और इस तालाब के पानी का आनंद उठा सकते हैं।।

5. सन डॉक

क्या आपने कभी आसमान है तीन सूरज देखे हैं ऐसी ही विचित्र प्राकृतिक घटना है जिसे सन डॉक कहा जाता है इसे देखकर आपकी आंखें चकमा खा जाएंगे । इसमें सूरज के दोनों तरफ प्रकाश के दो गोले होते हैं । जो की  सूरज के चारों तरफ मौजूद एक रिंग की तरह किनारों पर दिखाई देते हैं । यह घटना ज्यादातर बहुत ही ठंडे मौसम में होती है, जब सूरज की रोशनी वातावरण में मौजूद बहुत ही महीन बर्फ के कणों से होकर गुजरती है। ये ज्यादातर तभी दिखाई देती है जब सूरज क्षितिज के पास होता है इस घटना को ज्यादातर नॉर्थ डकोटा से फार्गो में देखा जा सकता है । यह एक बहुत ही अद्भुत घटना है।

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6 ऐसी जगह जिसपे विश्वास नही होगा

जहां वैज्ञानिकों ने दुनिया के कुछ सबसे बड़े रहस्य सुलझा लिए हैं,  लेकिन फिर भी दुनिया में कुछ ऐसी कई जगह है जिनसे वो अभी भी परेशान है या फिर हम कहें कि जिन को वैज्ञानिक असंभव मानते हैं कुछ अजीब फिनोमिना से लेकर असंभव सी दिखने वाली अजीब जगह इन सभी के बारे में मैं आज आपको बताने वाला हूं ।

1. औसंगेट माउंटेन 

औसंगेट माउंटेन, जिसे रेनबो माउंटेन के नाम से भी जाना जाता है अगर आप इस पर्वत पर खड़े होकर इसे देखेंगे तो आपको ये बस एक आम सा पर्वत लगेगा लेकिन अगर आप इसे ऊपर से देखेंगे तो आपको दुनिया भर के सारे रंग इस पहाड़ पर दिख जाएंगे । जिसे देखकर आपको भी लगेगा की ये पहाड़ किसी और दुनिया का है इसे देखने दुनिया भर से लाखों लोग हर साल यहां आते हैं, कई दशकों तक इस पर रिसर्च करने के बाद वैज्ञानिकों को पता चला की ये सब केमिस्ट्री का कमाल है। पहाड़ों में आयरन ऑक्साइड और क्लोरीन भरपूर मात्रा में पाया गया। जिसमें आयरन ऑक्साइड से लाल रंग और क्लोराइड से कुछ अलग अलग रंग बनते यहां दिखाई देते हैं। तो अगर आप कभी इस जगह पर जाएं तो आप इसे सिर्फ एक पहाड़ ना माने बल्कि कई लाखों सालों में हुआ प्रकृति का एक करिश्मा माने जो कहीं और देखने को नहीं मिल सकता ।

2. ब्लड फॉल्स

1911 में अंटार्टिका में एक बेहद अजीब चीज वैज्ञानिकों को मिली । एक ऐसा ग्लेशियर जिससे खून जैसा पानी बाहर निकलता है। जिस वजह से इसे ब्लड फॉल्स का नाम दिया गया और वैज्ञानिक आज भी यह नहीं समझ पाए यह है क्या कुछ वैज्ञानिक मानते हैं कि इस ग्लेशियर से निकलने वाले पानी में एक अलग तरह की काई है। जिससे यह पानी लाल होकर निकलता है। लेकिन कोई ठोस सबूत ना होने की वजह से इस आइडिया को एक साइड कर दिया गया। इसके अलावा कुछ वैज्ञानिक मानते हैं कि इस ग्लेशियर के नीचे एक प्राइनी लेक है। मतलब एक खारे पानी की झील है ,और इसी झील में लोहे के अटूट भंडार है, और जब वह पानी लोहे से टकराकर निकलता है तो लोहे पे लगे जंग की वजह से ये लाल हो जाता है । इस आइडिया पर अभी काम चल रहा है। इसके अलावा सोचने वाली बात यहां ये भी है कि इतने बड़े अंटार्टिका में सिर्फ इसी ग्लेशियर पे ऐसा क्यों होता है, कहीं और ऐसा क्यों नहीं हो सकता।

3. एल नेसला रॉक

अब अगली चीज जो मैं आपको दिखाने वाला हूं,  उसे देख कर ऐसा लगता है जैसे किसी माहिर कलाकार ने इसे बनाया हो । लेकिन यह सब प्रकृति का कमाल है। इस चट्टान को देखकर ऐसा लगता है जैसे इसे बीच में से किसी लेजर लाइट से काटा गया हो। लेकिन यह बिल्कुल प्राकृतिक है । इतनी बड़ी चट्टान पर कई जगह कलाकारी भी की गई है । लेकिन किसी इंसान के द्वारा ही से काटा जाना लगभग नामुमकिन है । तो यह हुआ कैसे। वैज्ञानिक मानते हैं कि इस चट्टान की शेप कुछ इस तरह की है जिससे यह ज्यादा से ज्यादा मात्रा में हवा को रोकती है। और हवा के दबाव से यह चट्टान दो हिस्सों में बंट गई । लेकिन यहां सोचने वाली बात ये है कि उस हवा में कितना दबाव होगा जिसने इतनी बड़ी चट्टान को भी काट दिया । लेकिन कुछ  वैज्ञानिक मानते हैं कि पुराने जमाने के लोग आज से भी ज्यादा एडवांस थे । और उन्होंने इसे लेजर से बीचो-बीच काटा होगा ।  लेकिन यह सभी तो मान्यताएं हैं,  सच क्या है किसी को नहीं पता।

4. दी नमीबियन सर्किल

ऊपर से देखने पर आपको एक दिखने में छोटे-छोटे गड्ढे लग सकते हैं , लेकिन असल में यह है क्या ? यह तो असल में आज तक दुनिया का कोई भी वैज्ञानिक नहीं बता पाया है । लोकल लोग मानते हैं कि यह भगवान के पैरों के निशान है।  लेकिन वह तो सिर्फ एक मान्यता है ।  इन सर्कल्स की चौड़ाई 10 से 60 फीट तक की है और यह सर्कल्स लगभग 1000 मील जितने बड़े एरिया में फैले हुए हैं लेकिन बात सिर्फ यही अटक जाती है कि सर्किल ही  क्यों,  कोई और शेप क्यों नहीं ? इस बात का पता कोई भी नहीं लगा पाया है । क्या आप बता सकते हैं कि यह है क्या।

5. नागा फायरबॉल

अब जिसके बारे में मैं आपको बताने वाला हूं, वो इस वीडियो का सबसे विवादास्पद टॉपिक है । साल के अक्टूबर महीने में मेकांग नदी के ऊपर आग जलती हुई दिखाई देती है लेकिन क्यों ? पीने वाले पानी में आग कैसे लग सकती है । यहां रहने वाले लोकल लोग मानते हैं कि यह उनके भगवान नागा की सांसो से निकलने वाली आग है जिसकी वजह से इसका नाम नागा फायर बॉल्स पड़ा।  लेकिन वैज्ञानिकों का ये अनुमान है कि इस नदी से जो ज्वालनशील फास्फाइन गैस निकलती है जो निकलते ही आग पकड़ लेती है । लेकिन सवाल अभी भी वही की वही है कि सिर्फ अक्टूबर के महीने में ही ऐसा क्यों होता है। और वैज्ञानिकों को अभी तक फास्फाइन गैस निकलने का कोई सोर्स  भी नहीं मिला है । लेकिन मजे वाली बात यह है अब यहां रहने वाले लोग अब इसे एक त्योहार के रूप में मनाने लगे हैं। यहां हर साल हजारों लोग इकट्ठा होते हैं और इसे बड़े चाव से देखते हैं।

6. आर्कटिक होल्स

नासा के अनुसार आर्कटिक बर्फ में कुछ अजीब होल्स दिखने लगे हैं, लेकिन कोई नहीं जानता कि यह है क्या।  आर्कटिक  वैसे ही अपने आप में एक अजीब जगह है। ऊपर से यह अजीब से होल यानी गड्ढे, वैज्ञानिकों को परेशान कर रहे हैं । इसके लिए वैज्ञानिकों ने तीन कारण दुनिया को बताएं ।

पहला ये, कि हो सकता है ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से बर्फ पिघल रही हो लेकिन यह किसी को सही नहीं लगा तो इसे सिरे से नकार दिया गया ।

दूसरा हो सकता है कि अंतरिक्ष से गिरने वाले पत्थरों की वजह से यह हुआ हो लेकिन इसके कोई पुख्ता सुबूत नहीं मिले।

और तीसरा कारण वैज्ञानिकों ने बताया कि हो सकता है कोई शील ऐसा काम कर दे,  क्योंकि उनको सांस लेने के लिए सतह पे आना पड़ता है। लेकिन आर्कटिक होल्स उन होल्स से बहुत बड़े हैं जो शील्स बनाती है । इसलिए ये कारण भी नकार दिया गया । इन गड्ढों को 2018 में ही खोजा गया है । तो इनके पीछे का कारण जानने में थोड़ा और समय जरूर लगेगा।

दोस्तो अब लोग बताइए कि इनमे से आपको सबसे अच्छी जगह कौन सी लगी ?

नीचे कमेंट में जरूर बताएं और इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।

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भारत के 7 सबसे शातिर जासूस

दोस्तों हम सबको जेम्स बॉन्ड,  मिशन इंपॉसिबल, वेवी जासूस जैसी फिल्में देखने का बहुत शौक होता है, लेकिन असल जिंदगी में जासूसों की जिंदगी इतनी आसान नहीं होती है। क्योंकि अपनी पहचान बदलकर दुश्मनों के बीच जाके रहना और वहां का सीक्रेट इंफॉर्मेशन अपने देश में पहुंचाना, बेहद जोखिम भरा काम होता है। और यह बहुत दुर्भाग्य की बात है कि देश के लिए अपनी जान गवाने वाले जासूसों के बारे में लोगों को पता भी नहीं चलता । यहां तक कि अपनी सरकार भी  उन्हें  अपने देश का नागरिक होने से इंकार कर देती है। फिर भी ये देशभक्त किसी भी बात के परवाह किए बिना अपने देश की सेवा करते रहते हैं। आज आपको भारत के ही कुछ ऐसे जाबांजो के बारे में बताने जा रहे हैं जिनके बारे में  सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे । और आपका हाथ इन जवानों को सलूट करने के लिए अपने आप ही ऊपर उठ जाएगा। और दोस्तों एक बात बता दूं कि मैं आपसे किसी भी जासूस की सीक्रेट  कॉन्फिडेंसियल इंफॉर्मेशन शेयर नहीं कर रहा हूं वही इंफॉर्मेशन बता रहा हूं जो इंटरनेट पर बहुत ही आसानी से उपलब्ध है। 

7. सहमत खान

सहमत खान किसी लड़की का बदला हुआ नाम है जो कि भारतीय अंडरकवर एजेंट थी जिन्होंने सन् 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान पाकिस्तान में जाकर जासूसी की थी। असल में सहमत कश्मीर में एक मुस्लिम अमीर परिवार की बेटी थी। लेकिन देश के लिए उन्होंने जासूसी जैसा जोखिम भरा काम चुना था। इस मिशन के लिए सहमत ने पाकिस्तान के एक बड़े आर्मी ऑफिसर से शादी की थी। ताकि वह आसानी से पाकिस्तान में घुस सके। यूं तो इस मिशन के दौरान सहमत ने भारत को पाकिस्तान की बहुत सी खुफिया जानकारी उपलब्ध कराई थी। लेकिन उनके द्वारा भेजी गई जानकारियों में सबसे अहम जानकारी पाकिस्तानी आर्मी द्वारा बनाया गया वह प्लान था जो  आई एन एस विराट को डुबोने के लिए बनाया गया था। सहमत कि इसी जानकारी के वजह से भारत ने पाकिस्तानी आर्मी के मंसूबे पर पानी फेर दिया था। और इससे हजारों लोगों की जान बच गई थी। इस मिशन को पूरा करके जब वह भारत लौटी तो वह गर्भवती हो गई थी। और  कुछ दिनों बाद सहमत ने  एक सुंदर बेटे को जन्म दिया जो कि आगे चलकर भारतीय सेना में भर्ती हुआ।  

सहमत खान के इस अद्भुत मिशन पर ही सन् 2018 में राजी नाम की एक फिल्म बनी थी जिसमें आलिया भट्ट ने अहमद खान का किरदार निभाया था हालांकि दुर्भाग्य से सन 2018 में ही सहमत खान की मृत्यु हो गई ।

6. रविन्द्र कौशिक

रविंद्र कौशिक जिन्हें पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के द्वारा द ब्लैक टाइगर का नाम दिया गया था । ये आज भी भारत के सबसे महान जासूसों में शुमार किए जाते हैं। राजस्थान के श्रीगंगानगर में जन्मे रविंद्र कौशिक शुरुआत से ही एक थिएटर आर्टिस्ट हुआ करते थे। और लखनऊ के एक थिएटर में एक्टिंग के दौरान ही रॉ के ऑफिसर की नजर उन पर पड़ी थी। उन्होंने रविंद्र के अभिनय से इतने प्रभावित हुए कि उसी समय रविंद्र को जासूस बनने का ऑफर तक दे दिया। रविंद्र ने भी तुरंत ही यह ऑफर स्वीकार कर लिया इसके बाद रॉ में उनकी ट्रेनिंग स्टार्ट हुई। और यह ट्रेनिंग 2 सालों तक चली जिसमें उन्होंने उर्दू इस्लामिक धर्म और पाकिस्तान के तौर तरीकों के बारे में सिखा। सन 1975 में मात्र 23 साल के रविंद्र अपने मिशन के लिए पाकिस्तान चले गए और भारत के अंदर उनकी सारी पुरानी पहचान नष्ट कर दी गई थी। और पाकिस्तान में उन्होंने नबी अहमद शाकिर के नाम से प्रवेश किया था। रविंद्र ने पाकिस्तान जाने के बाद कराची यूनिवर्सिटी से एलएलबी किया और एक पाकिस्तानी लड़की अमानत से शादी कर ली। पढ़ाई पूरी होने के बाद वह पाकिस्तानी आर्मी में शामिल हो गए और धीरे-धीरे मेजर के रैंक तक पहुंच गए। और इस दौरान पाकिस्तानी आर्मी की खुफिया जानकारी भारत को पहुंचाते रहे। जो कि भारत के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण साबित हुई हालांकि सन 1985 में रॉ के ही दूसरे जासूस की गलती की वजह से रविंद्र का भेद खुल गया और वह पकड़े गए। फिर उन्हें उम्र कैद की सजा सुनाई सुनाई गई और सन 2001 में टीवी की बीमारी के कारण पाकिस्तानी जेल में ही उनकी मृत्यु हो गई। इस जांबाज व्यक्ति ने  जेल की सजा के दौरान कभी भी अपना मुंह नहीं खोला और पाकिस्तान को कोई भी जानकारी नहीं थी।

5. मोहन लाल भास्कर

मोहनलाल भास्कर इंडियन इंटेलिजेंस एजेंसी रॉ के वो जासूस थे जो कि पाकिस्तान के न्यूक्लियर प्रोग्राम का पर्दाफाश करने में सबसे अहम भूमिका निभाये थे। इस मुश्किल मिशन को अंजाम देने के लिए उन्होंने इस्लाम धर्म कबूल करके उन्होंने अपना नाम मोहम्मद असलम रख लिया था। ताकि पाकिस्तान में किसी को उन पर शक ना हो सन 1967 में वह अपने पहले मिशन पर निकले थे और इंफॉर्मेशन शेयर करने के लिए मोहनलाल भास्कर ने करीब 15 बार भारत-पाकिस्तान सीमा को पार किया था । लेकिन सन 1968 में उनके ही 1 साथी अमरीक के धोखा देने के कारण उनका भेद खुल गया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। दरअसल अमरीक सिंह एक डबल एजेंट था जो भारत के साथ-साथ पाकिस्तान के लिए भी जासूसी कर रहा था । हालांकि पकड़े जाने के 14 साल जेल में रहने के बाद सन 1974 में भारत-पाकिस्तान क़ैदी एक्सचेंज के तहत उन्हें रिहा  कर दिया गया ।

4. सरस्वती राजमणि

सरस्वती राजमणि वह महिला थी जो कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम  के साथ-साथ इंडियन इंटेलिजेंस यूनिट में भी एक अहम भूमिका निभाई थी । सरस्वती नेताजी सुभाष चंद्र बोस से बहुत ही ज्यादा प्रभावित थी इसीलिए मात्र 16 साल की उम्र में ही आजाद हिंद फौज को ज्वाइन कर ली थी। और इस फौज में उनके काम को देखते हुए उन्हें इंडियन इंटेलिजेंस यूनिट में भी शामिल कर लिया गया था। और वह हमारे देश की इंटेलिजेंस यूनिट का हिस्सा बनने वाली सबसे पहली महिला थी। सरस्वती जी लड़के का भेष धारण करके अंग्रेजों की खुफिया जानकारी हासिल करने का काम करते थी। एक बार सरस्वती जी के ही एक साथी को अंग्रेजों ने पकड़ लिया था तो उसे छुड़ाने के लिए उन्होंने डांसर का भेष धारण करके अंग्रेज सिपाहियों के बीच में घुस गई थी और उन्होंने बड़ी ही चालाकी से सभी अंग्रेजों को नशे में धुत करके अपने साथी को छुड़ा लाई थी। इस मिशन में भागते समय उनके टांग पर गोली भी लग गई थी लेकिन फिर भी वह मिशन में कामयाब रही। हालांकि दुर्भाग्य से 13 जनवरी सन 2018 को हार्ट अटैक के कारण उनकी मृत्यु हो गई।।

3. अजीत डोवाल

इस समय हमारे देश के लिए नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर के रूप में काम कर रहे अजीत डोभाल जी अपने समय के बेहतरीन जासूसों में शुमार किए जाते हैं। उनके जासूसी के किस्से इतने जबरदस्त हैं उन्हें भारत के जेम्स बांड भी कहा जाता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि अजीत डोभाल जी जासूस होने से पहले एक आईपीएस ऑफिसर थे। और उनके पास यह ऑप्शन था कि अगर वह चाहते तो एक आईपीएस ऑफिसर के रूप में भी भारत की सेवा कर सकते थे । लेकिन उन्होंने भारत के लिए जासूस बनने का निर्णय लिया और अपनी जान जोखिम में डालकर भारत की सेवा की। अजीत डोभाल 7 साल तक पाकिस्तान में एक मुस्लिम बन कर रहे और वहां से पाकिस्तान की खुफिया जानकारी भारत भेजते रहे । एक अंडरकवर एजेंट के रूप में अपना काम पूरा करने के बाद वह पाकिस्तान में ही इंडियन हाई कमिशनर बना दिए गए और 6 साल तक इसी पोस्ट पर काम करने के बाद वह भारत लौट आए। और उन्हें उनके इन्हीं वीरता भरे कार्यों और कारनामों के लिए उन्हें भारत का दूसरे सबसे बड़े शौर्य वीरता पुरस्कार कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया है।।

2. कश्मीर सिंह

पंजाब के होशियारपुर के रहने वाले कश्मीर सिंह जासूस होने से पहले इंडियन मिलिट्री का हिस्सा हुआ करते थे और उनके फोटोग्राफी के शौक के वजह से ही उन्हें जासूस बनने के लिए ऑफर मिला था। और उन्होंने जासूसी को पार्ट टाइम जॉब के तरह शुरू किया था जिनके लिए ₹400 का महीना उनको मिलता था। दरअसल सिंह को पाकिस्तान बॉर्डर पर पाकिस्तान टुकड़ियों की संख्या के बारे में और उनके सैनिक टुकड़ियों की रणनीतिक स्थल की तस्वीर खींचने का काम सौंपा गया था।  वह साल 1969 में सबसे पहले मोहम्मद इब्राहिम के नाम से पाकिस्तान में घुसे थे। और अगले कई सालों तक भारत को पाकिस्तान की खुफिया जानकारी भेजते रहें। उनके द्वारा भेजी गई इंफॉर्मेशन सन 1971 के युद्ध में बहुत ही ज्यादा काम आई थी। लेकिन 1973 में एक-दूसरे इंडियन एजेंट के मुंह खोलने के वजह से उनका भेद खुल गया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। और आपको यह जानकर हैरानी होगी कि 35 साल तक को पाकिस्तान के जेल में रहे और उन्हें थर्ड डिग्री टॉर्चर दिया जाता था लेकिन इसने टॉर्चर शह  के भी वह अपना मुंह नहीं खोलें। और सन 2008 में उन्हें मानवीय आधार पर आजाद करके भारत में दिया गया।

1. रामेश्वर नाथ काव

रामेश्वर नाथ काओ एक ऐसे इंटेलिजेंस ऑफिसर थे जिन्हें सिर्फ भारत में ही नहीं पूरे दुनिया में एक अलग ही लेवल का जासूस माना जाता है। यूपी के वाराणसी से ताल्लुक रखने वाले काव ने अपने करियर की शुरुआत एक आईपीएस ऑफिसर के तौर पर की थी। लेकिन हमेशा से ही जासूसी में दिलचस्पी रखने के कारण ही उन्होंने सन 1969 में एक एजेंसी की स्थापना की जिसे आज हम सब रॉ के नाम से जानते है। और यही वजह है कि भारत में रोज ऐसी बेहतरीन खुफिया एजेंसी होने का श्रेय रामेश्वर नाथ काओ को दिया जाता है। वह एक ऐसे खुफिया इंसान थे जिनके निजी जिंदगी के बारे में आज तक किसी को कोई विशेष जानकारी नहीं है। हालांकि दुर्भाग्य से सन 2002 ईस्वी में 83 साल की उम्र में  उनका देहांत हो गया।।

ये थे हमारे देश के सात सबसे शातिर जासूस । दोस्तों आपको इन सातों में सबसे प्रभावित करने वाला जासूस कौन लगे। हमें कमेंट में जरूर बताएं।

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5 लुफ्त मिथक रहस्यमई शहर

सदियों से कई लुफ्त शहरों की कहानियां दंतकथा के रूप में सुनाई जा रही हैं इनमें से कई शहर इतने अद्भुत है कि इनका वास्तविक होना संभव नहीं लगता पर कई लोग ऐसे हैं जो कई तत्वों की वजह से मानते हैं ये लुफ्त शहर मौजूद थे या आज भी मौजूद हैं या फिर उनके अवशेष कहीं ना कहीं जरूर मौजूद होंगे । पहले जब विज्ञान इतना विकसित नहीं था तब फिर किस्से कहानियों पर विश्वास कर लेना आसान होता था पर आज जब विज्ञान इतना विकसित है और हम सब आधुनिक सेटेलाइट के जरिए धरती का कोना कोना देख सकते हैं तो यह सब लुफ्त  शहर एक मिथक लगते हैं क्योंकि इनका नामोनिशान हमें कहीं नहीं दिखाई देता। लेकिन इतने आधुनिक तकनीक के बाद भी हम धरती के अंदर, रेगिस्तान की रेत के नीचे, समुद्र के तल को, और घने जंगलों को पूरी तरह नहीं देख पाए हैं। तो संभावना है की ऐसे कई लुफ्त मिथक शहर आज भी मौजूद हो सकते हैं। तो दोस्तों आज मैं आपको ऐसे ही 5 रहस्य में लुफ्त शहरों के बारे में बताऊंगा जिनके बारे में दुनिया में कई सदियों से चर्चा चली आ रही है।

1. एल डोराडो

सोलहवीं शताब्दी में जब स्पेनिस ने दक्षिण अमेरिका का उपनिवेशीकरण शुरू किया तब उन्होंने स्थानीय लोगों से एक लुफ्त शहर के बारे में सुना जो दक्षिण अमेरिका के अज्ञात अंदरूनी जगह पर स्थित है । कहा जाता है कि यह शहर पूरी तरह से सोने का बना था । इसकी इमारतें, इसकी सड़कें, इसकी गलियां और इसके मंदिर सब सोने के बने थे और इस के राजा थे पुजारी जिसका पूरा शरीर सोने की धूल से ढका रहता था और इस शहर का नाम था एल्डोराडो तब से अब तक कई मशहूर खोजकर्ताओं ने सोने के शहर को ढूंढने की कोशिश की है पर वे सब विफल रहे हैं। कई लोग इस शहर को काल्पनिक मानते हैं और माना जाता है कि एल्डोराडो शब्द किसी शहर का नहीं है बल्कि इसका मतलब है सोने का पानी चढ़ा इंसान। और यह सब मुजेका जनजाति के परंपरा से आया है जिसमें मुजेका जनजाति के मुखिया अपने पूरे शरीर को सोने के धूल से ढक कर, एक नाव में सोने और अन्य कीमती चीजों के साथ एक तालाब के बीच में पहुंचते थे जहां वह तालाब में डुबकी लगाकर सोने को तालाब में डालकर अपने देवताओं को समर्पित करते थे । लेकिन आज भी कई लोग इस शहर को असली मानते हैं और मानते हैं कि यह शहर अमेरिका के घने अमेजॉन जंगलों में या कहीं दुर्गम स्थान पर छिपा हुआ है और आज भी इसे ढूंढने की कोशिश जारी है।

2. संभाला

संभाला एक पौराणिक शहर है और माना जाता है कि यह हिमालय में कहीं स्थित है । इस शहर का जिक्र कई प्राचीन ग्रंथ जैसा कि कालचक्र तंत्र और तिब्बत के प्राचीन लेख जैंगजुंग में आता है । इस शहर की दंत कथा हजारों साल से चली आ रही है और माना जाता है कि यह शहर आज भी मौजूद है। यह कहा जाता है कि सिर्फ वही आ रह सकता है जो मन और आत्मा से पवित्र है। कहा जाता है यहां रहने वाले लोग कभी बीमार नहीं पड़ते और वे कभी बूढ़े नहीं होते। यहां हमेशा शांति और बुद्धिमता का राज होता है अपने इस आध्यात्मिक वजह से कई लोग, जो  आध्यात्मिक लक्ष्य प्राप्त करना चाहते थे उन्होंने इसकी तलाश की है और कई लोगों ने दावा किया है कि वह इस शहर में गए हैं पर कोई भी इसका प्रमाण नहीं दे पाया है । कई लोगों का मानना है कि शहर के अंदर जाने का रास्ता हिमालय के दुर्गम जगह पर स्थित एक पुराने वीरान बौद्ध मठ में है जिसकी रक्षा संभाला के संरक्षक करते हैं। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि यह शहर एक अलग ही आयाम में स्थित है जिसकी वजह से लोगों को दिखाई नहीं देता । इस शहर के बारे में कहा जाता है कि इस शहर के बीचोंबीच एक महल मौजूद है जो हीरो की तरह चमकता रहता है इससे शहर से जुड़ी हुई कुछ भविष्यवाणी भी है। बौद्ध धर्म के मुताबिक इस शहर के भविष्य के राजा अपनी विशाल सेना लेकर इस विश्व को अन्याय और पाप से मुक्ति दिलाने बाहर आएंगे । वहीं हिंदू धर्म में विष्णु पुराण में कहा गया है भगवान विष्णु का दसवां और आखरी अवतार कल्कि अवतार इसी संभाला शहर में होगा जहां से ये  दोबारा सतयुग की स्थापना करेंगे।

3. अगारथा

दंत कथाओं के मुताबिक अगारथा है जो धरती के अंदर मौजूद हैं।  माना जाता है कि ये धरती के बीचोंबीच स्थित है, और धरती के चारों के किनारों से सुरंग से जुड़ा हुआ है। इस शहर के मानने वाले इस सिद्धांत को मानते हैं कि धरती अंदर से खोखली हैं।  इस शहर का जिक्र सबसे पहले यूरोप के महान दार्शनिक प्लेटो ने किया था । उन्होंने बताया था कि सुरंग से होकर धरती के अंदर एक रास्ता शहर की ओर जाता है। जहां के लोग बहुत ही विनम्र और शांतिप्रिय हैं।  कुछ 100 सालों के बाद यूरोप के एक महान दार्शनिक बैली (Niccolo Machiavelli) ने इस बात का जिक्र किया था कि अटलांटिस शहर के तबाह होने के बाद बचे हुए अटलांटिस के लोग हैं धरती के नीचे जा बसे थे।  कई लोग इसे सिर्फ कल्पना मानते हैं । तो कई गुप्त संगठन यह मानते हैं की ये  शहर आज भी धरती के अंदर मौजूद है। 

4. अटलांटिस

अटलांटिस अब तक का  सबसे लोकप्रिय मिथक शहर है इसके ऊपर कई किताबें लिखी जा चुकी है और कई चलचित्र भी बन चुके हैं। अटलांटिस का जिक्र  सबसे पहले यूरोप के महान दार्शनिक प्लेटो की किताब टायमिस और क्रिटियस में हुआ था। प्लेटो के लेख के मुताबिक ये शहर आज से 11000 साल पहले अटलांटिक महासागर के द्वीप पर बसा था। यह शहर बहुत ही अत्याधुनिक तकनीकों से लैस था और उस वक्त की सबसे बड़ी नौसेना ताकत था। कहा जाता है की इसके राज्य का विस्तार और प्रभाव अफ्रीका एशिया यूरोप और अमेरिका तक था । माना जाता है, यह पूरा शहर एक रात और 1 दिन में भूकंप की वजह से समुद्र में डूब गया ज्यादातर लोग इस शहर को एक  मिथक मानते हैं पर कुछ लोगों का मानना है कि यह शहर सच में मौजूद था और इसके अवशेष आज भी समुद्र में कहीं मौजूद होंगे।

5. हाय ब्रसिल

हाय ब्रसिल अब तक का सबसे रहस्यमय मिथक शहर है। क्योंकि लोगों का मानना है कि यह शहर आईलैंड के पश्चिमी तट पर एक द्वीप पर स्थित है जो हर 7 साल में एक बार दिखाई देता है। पर कोई भी आज तक इस द्वीप तक नहीं पहुंच सका है।  यह द्वीप  1325 से 1800  तक कई प्राचीन नक्सो में  दिखाया गया है । और इस द्वीप पर पहली बार जाने की कोशिश 1480 में जॉन जुनियर ने किया था । वे ब्रिस्टल  इंगलैंड से रवाना हुए पर वह कभी भी उस पर नहीं पहुंच पाए और उन्हें खाली हाथ ही वापस आना पड़ा । 1497 में भी स्पेन के एक राजदूत पेट्रोटीआलिया ने इस द्वीप को देखे जाने का दावा किया।  दावों के मुताबिक हर 7 साल बाद यह टापू धुंध में घिरा हुआ दिखाई देता है।

तो दोस्तो कैसा लगा ये रोचक जानकारी । आपको कौन सा शहर सबसे प्रभावित किया। क्या लगता है आपको। हमे कमेंट कर के बताएं। 

धन्यवाद 

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5 लुफ्त अविष्कार जो हमारी दुनिया बदल देती

विज्ञान ने मनुष्य का जीवन बदल दिया है।  वैज्ञानिकों द्वारा किए गए कई आविष्कारों ने हमारे जीवन को बहुत ही आसान बना दिया है।  लेकिन कई आविष्कार ऐसे भी हुए हैं जो हमारे जीवन में बहुत बड़ा बदलाव ला सकते थे। लेकिन कुछ कारणवश ये अविष्कार गुम हो गए। 

आज हम आपको ऐसे ही आविष्कारों के बारे में बताएंगे जो लुप्त हो चुके हैं। 

1. स्लूट डिजिटल कोडिंग सिस्टम 

दोस्तों जब आप स्मार्ट फोन खरीदते हैं तो आप एक चीज पर जरूर ध्यान देते हैं इसकी इंटरनल और एक्सटर्नल मेमोरी कितनी है। मेमोरी चाहे कितनी भी मिल जाए लेकिन आखिर में कम पड़ ही जाती है।  दोस्तों जरा सोचिए अगर आपके पास 2 जीबी इंटरनल मेमोरी वाला फोन हो और आपका फोन सिर्फ 2GB एक्सटर्नल मेमोरी सपोर्ट करता हो, लेकिन इसके बावजूद आप 128 GB वाले फोन से भी ज्यादा डाटा सेव कर पाए तो कैसा हो। जैन स्लुट (Romke Jan Bernhard Sloot) ने भी भी कुछ ऐसा ही आविष्कार किया था । जैन स्लुट एक डच इलेक्ट्रॉनिक टेक्नीशियन थे। उन्होंने ऐसी डाटा कंप्रेशन टेक्निक बनाई थी जिससे की पूरी हॉलीवुड मूवी सिर्फ 8 केवी में कंप्रेस की जा सकती थी। और उन्होंने इसे नाम दिया स्लूट डिजिटल कोडिंग सिस्टम। उन्होंने इस तकनीक का प्रदर्शन फिलिप्स  कंपनी के एक्जीक्यूटिव के सामने किया था, जिसमें उन्होंने सिर्फ 64 केवी के चिप से  8  फिल्में एक के बाद एक चला कर दिखाई। लेकिन इससे पहले जैम स्लूट इस तकनीक का सोर्स कोड फिलिप्स कंपनी को दे पाते, 11 जुलाई 1999 को बहुत ही रहस्यमय तरीके से उनकी मौत हो गई । जिस फ्लॉपी ड्राइव में उन्होंने इस फार्मूले का सोर्स कोड सेव किया था वह भी रहस्यमय तरीके से गायब हो गया। कई महीने बाद तक भी उस फ्लॉपी ड्राइव को ढूंढने पर भी नहीं मिली।

2. स्टार लाइट 

केमिस्ट मॉरिस बोर्ड ने 1970 और 80 के दशक के दौरान एक ऐसे पदार्थ का आविष्कार किया था। जो बहुत ही ऊंचे तापमान को झेल सकता था। इस पदार्थ का नाम उन्होंने स्टार लाइट रखा था। एक टीवी शो साइंस एंड टेक्नोलॉजी के दौरान उन्होंने इस पदार्थ का प्रदर्शन भी किया था।  कहा जाता है कि यह पदार्थ 10000 डिग्री से भी उच्चा तापमान सकता था। यहां तक कि न्यूक्लियर एक्सप्लोजन का तापमान भी ये आसानी से सह सकता था। एक एक्सपेरिमेंट में उन्होंने दर्शाया था  कि एक अंडे को स्टार लाइट से ढक दिया जाए और इसे आग में फेंक दिया जाए तो भी अंडा सुरक्षित रहेगा। नासा ने भी इस पदार्थ में दिलचस्पी दिखाई थी । लेकिन मॉरिस बोर्ड ने इसके निर्माण का तरीका कभी किसी को नहीं बताया और इस पदार्थ के निर्माण का तरीका उनकी मौत के साथ ही लुप्त हो गया।

3. डेथ रे 

निकोला टेस्ला अपने जमाने के महानतम वैज्ञानिकों में से एक थे। उनके आविष्कार अपने समय से कहीं आगे थे। उन्होंने कई आविष्कार ऐसे किए जो आज भी मानव जाति के काम आ रहे हैं। और उनके कई आविष्कार ऐसे थे जो उनके साथ ही लुफ्त हो गए या फिर दबा दिए गए। कहा जाता है कि 1930 में पार्टिकल बीम बेपन का आविष्कार किया गया था।  जिसे डेथ  रे के नाम से भी जाना जाता था। ये हथियार बड़े-बड़े एयरक्राफ्ट को मिलो दूर से ही मार गिराने में सक्षम था। यह हथियार इतना शक्तिशाली था कि ये जिस भी देश के पास हो वह युद्ध में कभी भी नहीं हारता। लेकिन कहा जाता है कि डेथ रे को निकोला टेस्ला कभी भी पूरा नहीं कर पाए । क्योंकि जो धनराशि इसके लिए चाहिए थी, वो उन्हें कभी भी नहीं मिल पाई । उस समय लोगों का मानना था,  कि इस तरह का हथियार बनाना संभव नहीं है।  इसलिए कोई भी कंपनी और कोई भी देश इस प्रोजेक्ट पर पैसे लगाने के लिए तैयार नहीं हुआ और यह अविष्कार टेस्ला की मौत के साथ ही लुप्त हो गया। 

4. क्रोनोवाइजर

कहा जाता है कि 1964 के दौरान फादर एर्नटी (Pellegrino Ernetti) ने एक ऐसी मशीन का निर्माण किया था जो भूतकाल की चीजे देख और सुन सकती थी। इस मशीन को क्रोनोवाइजर के नाम से भी जाना जाता है। फादर  एर्नटी के मुताबिक लुमिनियस एनर्जी और साउंड जब वस्तु से निकलती है तो वातावरण में रिकॉर्ड हो जाती है और क्रोनोवाइजर के इस्तेमाल से इस एनर्जी के द्वारा हम भूतकाल की चीजें देख और सुन सकते हैं। उनका कहना है कि इस मशीन की स्क्रीन से उन्होंने भूतकाल के कई क्षणों को देखा था जिसमें उन्होंने जीसस का क्रुश पे लटकना भी देखा था। अपने अंतिम क्षणों के दौरान फादर एर्नटी ने उन सब लोगों से मुलाकात की जिन्होंने इस मशीन को बनाने में उनकी मदद की थी और इस मुलाकात के बाद इस मशीन को नष्ट कर दिया गया ।

5. क्लाउड बस्टर

क्लाउड बस्टर एक ऐसा डिवाइस था जो बारिश पैदा कर सकता था।  इसका निर्माण एक ऑस्ट्रेलियन साइकोएनालिस्ट विलिहम रिक  (Wilhelm Reich) ने किया था। ये डिवाइस बारिश के प्रति वातावरण में मौजूद एक एनर्जी को मैनुपुलेट करता था । और इस एनर्जी को विलहम रिक ने आर्गोन एनर्जी का नाम दिया था। 1953 में 2 किसानों के कहने पर इस मशीन का प्रयोग किया गया था। सूत्रों के मुताबिक 6 जुलाई 1953 को विल्हम रिक ने सुबह के समय क्लाउड बस्टर का इस्तेमाल किया था और शाम तक बारिश शुरु हो गई।  1953 के बाद उन्होंने यह प्रयोग फिर कभी नहीं किया।  उस समय उनके आविष्कारों और क्लाउड बस्टर को गैरकानूनी करार दिया गया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।  और बाद में जेल में ही उनकी मौत हो गई कई लोगों का मानना है कि डॉ विलहम रीक के इस आविष्कार से किसानों को काफी मदद मिलती और अनाज की पैदावार भी बढ़ जाती।  लेकिन कई अमीर देश ऐसा नहीं चाहते थे।  क्योंकि अगर ऐसा हो जाता तो गरीब देशों से उनका नियंत्रण हट जाता और इसलिए उन्होंने विलहम रीक को कैद कर लिया और उनके आविष्कार को नष्ट कर दिया उनके आविष्कार के अवशेषों को अभी भी रेंगले माइन में देखा जा सकता है।

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10 ऐसे खोज जो गलती से हो गए

दोस्तों जो भी आविष्कार होते हैं उनके पीछे वैज्ञानिकों के कई सालों के शोध और मेहनत होती है। कोई भी आविष्कार आसानी से और तुरंत नहीं होता। लेकिन कई ऐसे बड़े आविष्कार भी हुए हैं जो अनजाने में हो गए आइए आपको भी बताते हैं कि कौन-कौन से हैं ऐसे आविष्कार जो अनजाने में और गलती से हुए। 

1. एक्स-रे 

क्या आप जानते हैं कि एक्स-रे का आविष्कार गलती से हुआ था।  नहीं जानते तो बता दें की सनकी भौतिक बैज्ञानिक के रूप में विख्यात विलहम रॉन्टजन (Wilhelm Röntgen) ने एक्स-रे का आविष्कार किया था। दरअसल विलहम कैथोरिक रेज ट्यूब बनाना चाह रहे थे। इसी दौरान जब लाइट चमक रही थी तभी उन्होंने देखा कि अपारदर्शी कवर के बावजूद नीचे रखा पेपर दिखाई दे रहा था। वे हैरत से इसे देखने लगे और इस प्रकार एक्स-रे का आविष्कार हो गया। 

2. माइक्रोवेव

माइक्रोवेव का आविष्कार पर्सी स्पेंसर (Percy Spencer)  ने गलती से किया था। वह नए वैक्यूम ट्यूब के जरिए रडार से जुड़े रिसर्च कर रहे थे।  इसके लिए उन्होंने कई मशीनें भी बनाई। जो की रिसर्च में मदद करती। ईसी के एक्सपेरिमेंट के दौरान उन्होंने देखा की उनकी जेब में रखा कैंडीबार पिघलने लगा। वे हैरान हो गए और उन्होंने बाद में कुछ पॉपकॉर्न्स को उस मशीन के अंदर डाला और पाया कि पॉपकॉर्न फूटने लगे और इस प्रकार माइक्रोवेव ओवन का आविष्कार हुआ।

3. पेस मेकर

पेस मेकर का आविष्कार भी गलती से हुआ।  बायोमेडिकल इंजीनियर जॉन हॉप्स रेडियो फ्रिकवेंसी के जरिए बॉडी टेंपरेचर को रिस्टोर करने के लिए एक प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे इस दौरान उन्हें एहसास हुआ कि अगर दिल ठंड के कारण धड़कना बंद कर दें। तो कृत्रिम उत्तेजना पैदा करने से तो फिर से धड़कना शुरू कर देता है।  इसी प्रयोग के चलते पेसमेकर अस्तित्व में आया। 

4. स्लिन्की

स्वीडन नौसेना में इंजीनियर रहे रिचर्ड जॉन्स ने 1943 में स्लिन्की का आविष्कार किया था। वे नौसैनिक युद्धपोत पर बिजली की निगरानी करने के लिए यंत्र बना रहे थे। जो कि स्प्रिंग के सहारे काम करता था।  इसी दौरान स्प्रिंग जमीन पर गिर गया और बाउंस करने लगा। इस तरह गलती से स्लिंकी का आविष्कार हुआ।

5. पेनिसिलिन

वैज्ञानिक अलेक्जेंडर फ्लैमिंग घाव को भरने वाली एक चमत्कारी दवा का आविष्कार करना चाह रहे थे लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल रही थी ऐसे में उन्होंने एक्सपेरिमेंट की गई चीजों को बाहर फेंक दिया।  कुछ दिन बाद जब उन्होंने नोटिस किया तो पाया कि वहां आसपास के बैक्टीरिया समाप्त हो रहे थे। इस तरह से पेनिसिलिन का आविष्कार हुआ। 

6. कोका कोला 

सिरदर्द के इलाज के लिए दवा बनाने के लिए एक फार्मासिस्ट ने कोला नाट और कोला की पत्तियों का इस्तेमाल किया इसके बाद उसने संयोगवश दोनों को कार्बोनेटेड वॉटर के साथ मिला दिया  बाद में जब उसने टेस्ट किया तो रिजल्ट कोका कोला के रूप में सामने आया। कोला के कारण इसका नाम कोका कोला हो गया। इस तरह से एक सिर दर्द की दवा एक मशहूर ड्रिंक में बदल गई और पूरी दुनिया पर छा गई।

7. टेफलॉन

टेफलॉन का आविष्कार 1938 में साइंटिस्ट रॉय फ्लैंकिट ने किया था। दरअसल रॉय रेफ्रिजरेटर के विकल्प की तलाश कर रहे थे।  इसके लिए उन्होंने कुछ सैंपल्स को टाइट बॉक्स में रखा था।  कुछ दिन बाद उन्होंने देखा कि बॉक्स के अंदर रखी गई गैस गायब हो गई है।  और उसकी जगह फिसलन दार रेसिन के अवशेष बचे हुए हैं।  इस अवशेष में हिट और केमिकल्स के प्रतिरोधक क्षमता थी। बाद में नॉन स्टिक कुकवेयर, स्पोर्ट्स इक्विपमेंट्स और पेंट के रूप में इसका यूज होने लगा।

8. वायग्रा 

फाइजर ने दर्द से छुटकारा दिलाने के लिए हमारे शरीर में रक्त संचार करने वाली धमनियों को सिकुड़ने में मदद करने के लिए UK 92480 के नाम से एक दवा बनाई थी।  लेकिन यह दवा दर्द से राहत देने में तो असफल रही लेकिन पुरुषों की यौन शक्ति बढ़ाने में बहुत ही कारगर साबित हुई। इसे व्हायग्रा के नाम से बाजार में उतारा गया।

9. वेलक्रो

एक ट्रिप के दौरान स्विस इंजीनियर जॉर्ज डी मस्टर्ल (George de Mestral) ने अपनी पेंट से कुछ बीजों को चिपके देखा । उन्होंने पाया कि ये किसी भी लूब्स की आकार वाली वस्तु से चिपक जाते हैं ऐसे में उन्होंने कृत्रिम लुब्स तैयार किए और परिणाम स्वरूप वेलवेट और क्रॉचेट के कॉम्बिनेशन से वेल्क्रो बन गया।

10. पोटैटो चिप्स 

1853 में जॉर्ज क्रम नाम के सेफ अपने कस्टमर के लिए फ्रेंच फ्राइस तैयार कर रहे थे। कस्टमर ने उनसे कहा की फ्रेंच फ्राइस थोड़ी पतली और कुरकुरी होनी चाहिए। जॉर्ज ने ऐसा ही किया और इस तरह से पोटैटो चिप्स बन गई।।

तो दोस्तो कैसा लगा ये ब्लॉग।। वैसे कौन सा अविष्कार आपको सबसे अच्छा लगा। कॉमेंट करके जरूर बताएं।।

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6 विलुप्त अविष्कार जो हमारी दुनिया बदल देती

सोचिए अगर मोबाइल फोन, इंटरनेट, कंप्यूटर या हवाई जहाज की खोज ना हुई होती तो हमारी जिंदगी कैसी होती।  कुछ बेहतरीन आविष्कारों ने हमारी जिंदगी को पूरी तरीके से बदल दिया है। लेकिन कुछ ऐसे भी आविष्कार थे । जो हमारी दुनिया को पूरी तरीके से बदल सकते थे। लेकिन वह आविष्कार को हम लोगों से छुपाए गए या के लिए दवाएं गए आज हम ऐसे ही पांच आविष्कार के बारे में बात करेंगे जो हमारी जिंदगी को बदल सकते थे।

1. प्लाज्मा बैटरी

डीमिट्री पेट्रोनोव (Dimitri Petronov) ने प्लाज्मा बैटरी का आविष्कार किया था। और दावा किया था इस बैटरी को बिना चार्ज किए 3 साल तक चलाया और इस्तेमाल किया जा सकता है।  उन्होंने इस बैटरी का इस्तेमाल करके अपना पूरा घर बिजली से प्रकाशित कर रखा था।  इस आविष्कार से इलेक्ट्रिसिटी की समस्या पूरी दुनिया में हल हो जाती। वैसे तो डीमिट्री पेट्रोनोव के बारे में जानकारी काफी कम है। बर्लिन की बेस्ट इंजीनियरिंग कॉलेज से उन्होंने इंजीनियरिंग किया था। और उसके बाद उन्होंने 20 साल से ज्यादा एक एविएशन कम्पनी में जॉब किया था । लेकिन इस अविष्कार के बारे में पता लगते ही मिलिट्री लैब मॉस्को से उन्हें आविष्कार दिखाने के लिए निमंत्रण मिला।  मिलिट्री को उनका आविष्कार पसंद आया और वह निवेश करने के लिए तैयार थे। लेकिन कुछ ऐसे भी शर्ते थी जिसे डीमिट्री खुश नहीं थे। इसके एक हफ्ते बाद डीमिट्री से एक वाडिमैन नाम के इंसान मिलने आया। उस मुलाकात के बाद डीमिट्री काफी चिंतित रहने लगे। और कुछ महीनों में वह गायब हो गए।  जब उनकी बहन पुलिस में गुमशुदा होने की रिपोर्ट लिखवा कर वापस आयी तो पता चला उनके घर में दो मिलिट्री के आदमी घुसकर प्लाज्मा बैटरी लेकर चले गए। और 1 साल बाद रसिया के वोल्गा नदी के पास सड़ी हुई लाश मिली। जिसे डीमिट्री कि लाश बताई जाती है।

2. टॉम ओगल कार्बोरेटर

टॉम ओगल ने 1978 में एक ऐसा कार्बोरेटर बनाया जो ऑटोमोबाइल इंडस्ट्रीज का नसीब ही बदल देता। यह आविष्कार तब हुआ जब 19 साल के टॉम ने अपने लॉन मूवर के  फ्यूल टैंक में गलती से छेद कर दिया। छेद को बंद करने की जगह पर टॉम ने उसे वैक्यूम लाइन की मदद से कार्बोरेटर में लगा दिया और इससे फ्यूल टैंक आधा भरा होने के बावजूद लॉन मूवर लगातार 96 घंटे तक चलते रहा। ये चीज को देखते हुए उन्होंने अगले कुछ सालों तक इसे अपनी कार पर एक्सपेरिमेंट किए। जिनमें उन को काफी सफलता भी मिली। उन्होंने फ्यूल पंप और कार्बोरेटर की जगह पर एक ब्लैक बॉक्स जिसे वह फिल्टर कहते थे उसको लगाया था। और इस फिल्टर की मदद से उन्होंने विशेषज्ञों और पत्रकारों के सामने  दो गैलन फ्यूल से 200 मील की दूरी खत्म करके दिखाई थी। और एक ऐसे मशीन का आविष्कार किया जिसने इंधन की खपत ना के बराबर होती थी। लेकिन जब टॉम को इस प्रोजेक्ट के लिए निवेश मिलना शुरू हुआ तो अफवाहें फैला शुरू हुई इसका पैटर्न दूसरी और कंपनियों के पास भी मौजूद है। जिसमें से अमेरिका की जानी मानी कंपनी जनरल मोटर का नाम भी शामिल था। ये बातों को सामने आने के बाद उनके साथियों का बरताव उनके लिए बदल गया और सेल कंपनी भी इसने शुरुआत में ढाई करोड़ डालर का निवेश किया था । उन्होंने वह भी वापस ले लिया। इसके बाद वे डिप्रेश हो गए और उन्हें नशे की आदत हो गई। 1981 में उनको बाद में किसी ने गोली मार दी जिसमें उनकी मृत्यु हो गई। लेकिन जांच के बाद उनकी मृत्यु को आत्महत्या घोषित किया गया।  टॉम के दोस्तों का कहना था कि वह आत्महत्या करने वालों में से नहीं थे।  लेकिन टॉम के मृत्यु से जुड़े काफी अनसुलझे सवाल हैं।  जैसे वह कंपनी जो दावा करती थी कि उनके पास इस अविष्कार के पेटेंट पहले से मौजूद हैं।  वह टॉम की मृत्यु के बाद कभी सामने नहीं आए।

3. विट्रम फ्लैक्साइल

कांच के दो खास गुण होते हैं। पहला यह पारदर्शक होता है और दूसरा यह आसानी से टूट जाते हैं। हाल ही में किए गए रिसर्च की वजह से आज ऐसे काँच बनाए गए हैं। जो आसानी से नहीं टूटते और इनका प्रयोग मोबाइल और अन्य सामान में किया जाता है । पर अभी भी हम कभी न टूटने वाले कांच बनाने की तकनीक से कोसों दूर है। लेकिन अगर इतिहासकारों की बात माने या तकनीक हजार साल पहले ही हासिल कर ली गई थी।  रोमन इतिहास में तीन बार ऐसे पदार्थ का जिक्र किया गया है इसे विट्रम फ्लैक्साइल नाम से जाना जाता है। इसके मुताबिक 14 से 37 वी सताब्दी में सम्राट टीवियर्स के साम्राज्य के दौरान अनजान व्यक्ति सम्राट के दरबार में एक कांच का घड़ा लेकर आया। उसने कहा कि ये कांच का घड़ा नहीं टूट सकता और इसे परखने के लिए उस कांच के घड़े को जमीन पर पटक कर देखा गया। जमीन पर गिरने के बाद भी वो घड़ा बिल्कुल नहीं टूटा पर वह मुड़ गया। जिसे उस व्यक्ति ने हथौड़े से पीटकर दोबारा ठीक कर दिया। यह सब देखकर सम्राट टीबेरियस हैरान थे। उन्होंने इस व्यक्ति से पूछा कि इस कांच के बनाने की विधि किस किसको पता है।  जिस पर उसने जवाब दिया कि इसकी विधि सिर्फ उसे पता है । इतना सुनते ही सम्राट टीबेरियस ने सैनिकों को उसका सिर काटने का आदेश दे दिया है। सम्राट टीबेरियस ऐसा इसलिए किए क्योंकि  वो इस बात से भयभीत थे इस तरह की चीज सोने और चांदी जैसी चीजों का मूल्य गिरा देंगे और उस व्यक्ति के साथ साथ कभी न टूटने वाले कांच की विधि विलुप्त हो गई । 

4. रोमन कॉन्क्रिट

प्राचीन रोमन सम्राट ने कई ऐसी इमारतें बनाई है जो समय को मात देते हुए आज भी खडी़ हैं। इनकी वास्तुकला के का अभिन्न अंग था कंक्रीट। ये कंक्रीट आज की कंक्रीट से काफी अलग है।  जहां आज की कंक्रीट 50 साल या उससे थोड़ा ज्यादा चल सकते हैं। वहीं रोमन कंक्रीट हजारों साल चलने के लिए बने थे। जिसकी वजह से की इमारतें आज भी खड़ी है। माना जाता है रोमन काउंटिंग का खास तत्व था ज्वालामुखी का राख। जो दरारों को फैलने से रोकता है। लेकिन समय के साथ रोमन कंक्रीट बनाने का यह कला विलुप्त हो गया ।

5. मिथ्रीडेटियम

आज तक किसी सांप के काटे क्या जहर का इलाज किया जाता है जो पहले इस बात का पता लगाया जाता है कि मनुष्य किस जहर से प्रभावित है। इसमें समय लगता है और इस समय के दौरान जहर से प्राभावित मनुष्य की मृत्यु भी हो सकती है। अगर ऐसा हो सके कि सभी जहर का इलाज सिर्फ एक दवा से हो जाए तो लाखों जानें बचाई जा सकती हैं । माना जाता है की  120 से  साठवीं सदी ईसा पूर्व में पॉन्ड्स के राजा मिथ्रीडेट्स ने ऐसी दवा ढूंढ निकाली थी जो किसी किस भी जहर को काट सकता था। राजा के चिकित्सकों ने इस दवाई को और भी बेहतर बनाया लेकिन समय के साथ यह दवा और इसके बनाने की विधि भी लुप्त हो गई। और इस दवा को बनाने का प्रयास कई लोगों ने किया है पर वो सारे इस प्रयास में विफल रहे हैं ।

6. रस्ट प्रूफ आयरन 

दिल्ली में कुतुब कंपलेक्स में एक लोहे का खंभा खड़ा है । जो कि भारत का प्राचीन धातु विज्ञान का जीता जागता मिसाल है। एक खंभा पंद्रह सौ साल या उससे भी पुराना बताया जाता है। खुले में होने के बावजूद हजारों साल के मौसम के बदलाव को झेलने के बावजूद इस खंभे में जंग लगने का जरा भी लक्षण नहीं दिखता है इस खंभे की ऊंचाई 24 फुट है और यह 99.72% लोग से बना हुआ है और इस पर ऑक्साइड तथा सुरक्षा पर चढ़ा हुआ है जो इसे जगने से बचाता है यह प्राचीन भारत के आधुनिक विज्ञान का अद्भुत नमूना है जो समय के साथ लुप्त हो गया है और जिसकी बराबरी हम आज भी नहीं कर पा रहे हैं।  क्योंकि आज भी ऐसे लोहे का निर्माण करने में असफल है जो पूरी तरह से जंग रोधक हो । माना जाता है कि ये लोहे का खंबा दिल्ली लाए जाने से पहले उदयगिरि में स्थापित था। जो की  गुप्ता समराज के दौरान स्थापित किया गया था । 

तो दोस्तो बताए आपको कौन सा आविष्कार आपको बेहद पसंद आया। कॉमेंट करके हमे बताए ।।